Ekadash Rudra Puja: Rituals, Mantras, and Benefits

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Ekadash Rudra Puja rituals with eleven forms of Lord Shiva, Vedic mantras and Rudrabhishekam
एकादश रुद्र पूजा | JiPanditji
ॐ रुद्राय नमः

एकादश रुद्र पूजा

शिव के ग्यारह रूपों का आह्वान — भय, रोग और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति देने वाला सबसे शक्तिशाली अनुष्ठान।

शिव पुराण कथा

ग्यारह रुद्रों की उत्पत्ति

शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिव ने असुरों से युद्ध कर देवताओं को उनका साम्राज्य लौटाने के लिए ग्यारह रुद्रों का रूप धारण किया था। इन ग्यारह रूपों की पूजा करने से भक्त को अत्यधिक आध्यात्मिक व भौतिक लाभ मिलता है — प्रत्येक रूप एक विशेष शक्ति, एक विशेष सुरक्षा और एक विशेष आशीर्वाद का प्रतीक है।

नीचे दी गई माला में हर मनका एक रुद्र रूप है — किसी भी मनके पर स्पर्श करें और उसका मंत्र व लाभ जानें।

ग्यारह रूप, एक माला

एकादश रुद्र माला

मनके पर टैप करें
पूजा का फल

एकादश रुद्राभिषेकम् के लाभ

सुरक्षाबुरी ऊर्जाओं व दुष्ट शक्तियों से रक्षा, सभी भय दूर होते हैं
आत्म-नियंत्रणइंद्रियों पर नियंत्रण, आध्यात्मिक उत्थान
आरोग्यअच्छा स्वास्थ्य, रोगों से राहत
कीर्तिनाम, प्रसिद्धि, शक्ति व सुख का आशीर्वाद
इच्छापूर्तिसभी उचित इच्छाओं की पूर्ति
शांतिसुख-शांति से भरा जीवन
अभिषेक द्रव्य

किस द्रव्य से कौन-सा फल

कुशोदकअसाध्य रोग शांति
दहीभवन-वाहन प्राप्ति
गन्ने का रसलक्ष्मी प्राप्ति
शहद व घीधनवृद्धि
तीर्थ जलमोक्ष प्राप्ति
इत्र मिश्रित जलरोगनाश
दुग्ध / गोदुग्धपुत्र प्राप्ति
शीतल जल / गंगाजलज्वर शांति
घृत धारा (सहस्रनाम सहित)वंश विस्तार
दुग्धाभिषेकप्रमेह शांति
शक्कर मिश्रित दूधजड़बुद्धि से विद्वता
सरसों का तेलशत्रु पराजय
शहदयक्ष्मा व पातक नाश
गोदुग्ध + शुद्ध घीआरोग्यता
अनुष्ठान क्रम

एकादश रुद्र होमम् विधि

स्वस्ति वाचन एवं शांति पाठ

संकल्प के साथ अनुष्ठान का शुभारंभ

गणेश, शिव व लक्ष्मी स्थापना

वरुण कलश व नवग्रह स्थापना सहित

ब्रह्म व अग्नि स्थापना

सभी देवी-देवताओं का आह्वान

नवग्रह मंत्र जप

प्रत्येक ग्रह के लिए 1 माला जप

एकादश रुद्र मंत्र पाठ

प्रत्येक रुद्र मंत्र का 1100 बार जप, चमकम सहित

शिव यंत्र पूजन व अभिषेक

108 बिल्वपत्र अर्चन सहित रुद्राभिषेक

होम

घी, चीनी, तिल, जौ, अष्टगंध, चंदन व नवग्रह समिधा सहित

आरती व तिलक मंत्र

ब्राह्मणों को प्रसाद व भोज के साथ समापन

मूल रुद्र मंत्र
ॐ रूद्र रूद्राय नमः
पंडित जी की आवश्यकता

जप संख्या के अनुसार व्यवस्था

प्रति रूप मंत्र जपपंडित जीअवधि
1100 मंत्र5 पंडित जी5–6 घंटे
2100 मंत्र7 पंडित जी7–8 घंटे
5100 मंत्र7 पंडित जी2 दिन (प्रतिदिन 7–8 घंटे)
कोरियर द्वारा प्राप्त होगा

ऊर्जावान प्रसादम्

शिव यंत्र
ऊर्जावान माला/कंगन
ऊर्जावान रुद्राक्ष
चुनरी
ऊर्जावान मौली (लाल धागा)
कुमकुम व अक्षत

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